सूर्य नमस्कार

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प्रत्यक्ष देवो जगदेक चक्षु: उत्थापयन सुप्त समस्त लोकान्
यो याति नित्यम् भुवनानि पश्यम् तं सूर्य देवम् शिरसा नमामि