गज़ल : आदमी :

अपनी ज़ुबाँ से जब भी मुकरता है आदमी
जीते हुए भी उस घड़ी मरता है आदमी

यह जानते हुए भी कि हर चीज़ है फानी
क्यों अपने उसूलों से उतरता है आदमी

उम्मीद के पहाड़ पर मिलती है जब शि़कस्त
गिरता है चटखता है बिखरता है आदमी

जाता है गुमाँ टूट और आता है ़खुदा याद
जिस व़क्त मुश्किलों से गुजरता है आदमी

कुछ इस तरह का हो गया लोगों का रवैया
पढ़ता है और नौकरी करता है आदमी

जंगल में जानवर लगा करते हैं ़खतरना़क
शहरों में आदमी से भी डरता है आदमी

लोकभाषा: परिवर्तन 2

  1. महाप्राणीकरणः
    अल्पप्राण ध्वनियों का महाप्राण उच्चारणः
    जुकाम झ जुखाम
    बन्दूक झ बन्ध्ूाक
    आप झ आफू
    कबाड़ी झ कभा्ड़ि
  2. अल्पप्राणीकरणः
    महाप्राण ध्वनियों का अल्पप्राण उच्चारणः
    तारीख झ तारिक
    बाघ झ बाग
    कंजूस झ कंचूस
    झूठ झ झुट
  3. अघोषीकरणः
    सघोष ध्वनियों का अघोष उच्चारणः
    रेजगारी झ रेचगारि
    पोस्टकार्ड झ पोस्टकाट
    अन्दाज झ अन्ताज
    गजब झ गजप {क्रमशः}

भजन : जै हो :

भजन : जै हो :

मात भवानी तेरि जै हो
जग कल्यानी तेरि जै हो
त्वीले भजाई हर एक बुराई
चतुर सयानी तेरि जै हो
मात भवानी तेरि जै हो

उच्च सिखर मैं रौंछै मैया
कष्ट हरण हूं औंछै मैया
दीन दुखी की आस पुरि कर्न्य
हे महादानी तेरि जै हो
मात भवानी तेरि जै हो

द्याप्त लगै करनान तेरि पूजा
बिपदा मैं क्वे नै हुन दूजा
हर संकट मैं औंछि हमेसा
याद सुहानी तेरि जै हो
मात भवानी तेरि जै हो

अंस हमूं मैं तेरो परमेस्वरि
बंस हमारे तेरो मातेस्वरि
सब्बौ की ईजा की ईजा
ठुलि महारानी तेरि जै हो
मात भवानी तेरि जै हो

jai ho

भजन: ओ मैया:

o maiyaभजन: ओ मैया:

हे दुख हरन्या मंगल करन्या
भाग्य विधाता छै तू माता

मातेश्वरि सब्बै जाग हैरै
तेरी जय जयकार ओ मैया
वन्दन कर स्वीकार

सब्बौ को शुभचिंतन करन्या
भक्त जनौं का संकट हरन्या

म्यर ख्वर मैं हाथ राख दे मैया
एत्ती कर उपकार ओ मैया
कर म्यर लै उद्धार

भौसागर छ दुखौ को सागर
जब हैगो यो सत्य उजागर

तू ई छै मेरि ताकत मैया
तू ई छै पतवार ओ मैया
कर दे नैया पार