गजल: किलै:

kilaiगजल: किलै:

वीकि उम्मीद
टूटि गै होली
तबै एसि बात
वील कै होली

या त कोई तनाव
होल वीखन
के कमी काम मैं
है रै होली

कति परेसान होल
उ जो लै होल
दुन्य यो जैल लै
बनै होली

मन अगर सान्त
रौ हमेसा त
तुम बता गड़बड़ी
किलै होली

सान्ति की रच्छ कर्न
खन कूनान
जो होल असान्त
वीकि जै होली

गजल: नै हुन:

nai hunगजल: नै हुन:

लड़ै कसि लगै हो गर वां
धर्म अर ईमान नै हुन
जित्न वाला लै हार्न वाला है
कम नुकसान नै हुन

हर एक लड़ाई जित्नि
जरूरी नै हुनि कभ्भैं लै
हर एक हार है शिक्षा लिन
मैं लै अपमान नै हुन

परनिंदा या परउपदेस
जमानै आदत छू
आप्नि बुराई सुनिबेर क्वे
चुप रौ आसान नै हुन

मूर्ख हुनान जो बात बात मैं
लड़ै झग्ड़ करनान
समझदार जो आप्नी चुगली
सुनिबेर हैरान नै हुन

गजल: लाग्नौ:

laagnauगजल: लाग्नौ:

जै लै देखै जां लै देखौ
तौलाट मैं लाग्नौ
चंपौत मैं लाग्नौ उ ई
लूघाट मैं लाग्नौ

जीपौ बसौ क बीच मैं
रिटन्यान दुपहिया
हर रोड मैं लाग्नौ उ ई
हर बाट मैं लाग्नौ

इस्कूल मैं क्वे और क्वे
औफिस मैं परेसान
खेतिपाति मैं हो बिजनेस मैं हो
अलज्याट मैं लाग्नौ

मोबाइल मैं चैबेर जो
पढ़नौ या लेखन्नौ
एैराम मैं लाग्नौ उ ई
अब ठाट मैं लाग्नौ

गजल: अंदाज:

andaazगजल: अंदाज:

आओ भैटो चहा पि जाओ
गई दिनौं क रिवाज छू
हाय हैलो हाउ अर यू सी यू
बाय नई अंदाज छू

एत्थ उत्थ क्वे मिल्न्य नहां
अर अगल बगल क्वे पुछ्न्य नैं
फ्रैंड तमाम फेसबुक मैं अर
वट्सप लीबेर नाज छू

घुण मैं हाथ लगैबेर ढोक
दिनौ फैसन लै नई नहां
हग कैबेर अंग्वाल हाल्न्य
रीतौ क गजब आगाज छू

पैंली बस मैं और जीप मैं
इष्ट मित्र सित बात हुंछी
अब बाइक मैं और कार मैं
इंजन वालि आवाज छू

गजल: कस टैम:

kas taimगजल: कस टैम:

कस टैम आ कि आप्न
बिराना जसा है ग्यान
आंखा क साम्न रून्य
बजारौं मैं हरै ग्यान

सहरौं मैं काम कन्र्य
लिग्यान आप्नि फेम्ली
तलि मलि कुड़ी मैं रौन्य
एत्थ उत्थ कै न्है ग्यान

उस्यैं त हर एक गौं क
लोग माल कै जान्यान
अफसोस कि म्यर गौं मैं
सिरफ तीन मौ रै ग्यान

होरी का ढोल बांज्छ्य
जै आंगन मैं हर बरस
वां रून्य आप्न गड़ भिड़ा
लै बान्ज बनै ग्यान

गजल: अस्सल:

 

assalगजल: अस्सल:

हर हाल मैं सच बोल्नै कि
आदत बड़ी अस्सल
हर काल मैं एक इष्टे की
चाहत बड़ी अस्सल

एक बात बतूं जैले यो
संसार बनै रा
उ ई त कंर्छ हम्रि
हिफाजत बड़ी अस्सल

तुम सो्च न वीक विषय मैं
नाहन जो तुमूं थैं
उ द्यख जो वीले कर्रै
इनायत बड़ी अस्सल

अस्सल नै लाग्नि तेरी
रिसायै कि खमोशी
तै है त तेरी बोल्न्य
सिकायत बड़ी अस्सल

जब :

jabग़ज़ल :: जब ::

जब लगै हंस्न रयूं भ्यार बटै मीत बणी
और जब रुन पड्यूं त भित्र बटै गीत बणी

भीड़ मैं के छू सही के छू गलत पत्त नहां
जस सबन ले करौ उस्सै करण की रीत बणी

जो रंग रूप बोलण चालण मैं अलग लागणीं
उनूंकैं एक्कै बतौणा क लिजी प्रीत बणी

आदिम आदिम मैं भेद भाव करण छाड़ि दियौ
फिर आफी द्यख लियौ कि हार कसिक जीत बणी .. अधिक के लिए ‘DEVDAAR.COM’