गज़ल: हसीन साज़:

kyaगज़ल: हसीन साज़:

सबसे हसीन साज़ अनासिर का साज़ है
सबसे नफीस गीत खुदा की नमाज़ है

तारों की तरह अर्श के बन्दे हैं करोड़ों
सूरज की तरह एक वो बन्दानवाज़ है

हर आदमी मशगूल है रोटी की फिकर में
रोजी का इंतजाम यहाँ का रिवाज़ है

रोटी ने खड़े कर दिए बाजार और शहर
ईमान के झण्डे तले पैसों का राज है

खाने की पहनने की औ रहने की जंग में
हर हाथ में तलवार है हर सर पे ताज है

दुनिया को है पसन्द बहुत इश़्क.ए.मजाजी
हम को तो अपने इश़्क.ए.ह़कीकी पे नाज़ है

गज़ल : करते हैं :

karte hainगज़ल : करते हैं :

चाँदनी रात में जब फूल खिला करते हैं
ज़मीन और आसमान मिला करते हैं

इस ज़माने में दिलों की ज़मीन पर अक्सर
प्यार के पौधे पनपते हैं हिला करते हैं

प्यार में दूरियाँ बढ़-चढ़ के मज़ा देती हैं
मतलबी लोग जुदाई का गिला करते हैं

जाने क्या बात है आँसू की तरल धारा से
स़ख्त से स़ख्त कलेजे भी छिला करते हैं

कैसे जीते हैं फटी ज़िन्दगी की चादर में
जो भड़कते हुए पैबन्द सिला करते हैं

जब से दिल टूटा है सर थाम के बैठे हैं वो
हर एक बात पे लाहौल विला करते हैं

गज़ल : कोई बात नहीं :

koi baatगज़ल : कोई बात नहीं :

तुम पे हालात के ़खतरे हैं कोई बात नहीं
जहाँ ने ज़ुल्म ही करे हैं कोई बात नहीं

जिनकी आँखो में चमकती थी हमेशा उल्फत
आज कुछ अश्क के ़कतरे हैं कोई बात नहीं

सबको मालूम है कि ज़िन्दगी की राहों में
दर्द के काँच से छितरे हैं कोई बात नहीं

आफतें आने पे आकाश के ़फरिश्ते भी
अर्श से ़फर्श पे उतरे हैं कोई बात नहीं

सभी की उम्र की किताब के नाज़ुक पन्ने
दीमक-ए-व़क्त ने कुतरे हैं कोई बात नहीं

अपनी तकली़फ बार-बार बयाँ मत करिए
हम भी इस दौर से गुजरे हैं कोई बात नहीं

गजल : मत करना :

mat karnaगजल : मत करना :

धड़कनें बेकरार मत करना
मेरी यादों से प्यार मत करना

दिल अगर जिद करे तो रो-रो कर
आँख नम बार बार मत करना

ज़िन्दगी की सियाह रातों में
ख़्वाब का एतबार मत करना

वो जो उल्फत में जान देते हैं
मुझको उनमें शुमार मत करना

मुझको मजबूरियों ने लूट लिया
अब मेरा इन्तज़ार मत करना

हरेक चीज़ की हद होती है
कभी उस हद को पार मत करना

गजल: किसलिए:

 

kisliyeगजल: किसलिए:

किसलिए प्यार में सताया गया
कोई कारन नहीं बताया गया

बज्म-ए-उलपफत में जब भी पाँव रखा
दिल का हर मामला दबाया गया

कोई गुनाह न होने पाए
इसलिए ज़्ाुल्म-ओ-सितम ढाया गया

बेवफाई न हो सकी हमसे
उनसे वादा नहीं निभाया गया

जाने अब नींद क्यों नहीं आती
ख़ुद को किस-किस तरह सुलाया गया

मेरी आँखों से अश्क का कतरा
गिर पड़ा या उसे गिराया गया

गजल: ही रहे:

hi raheगजल: ही रहे:

मुस्कराते भी रहे आह भी भरते ही रहे
तुम्हें भुलाते रहे याद भी करते ही रहे

तुम्हारे प्यार की ऊँचाइयों को छू-छू कर
हकीकतों की तलहटी में उतरते ही रहे

कभी गर्मी कभी बरसात कभी शीत लहर
लब-ए-अवाम की सुर्खी में उभरते ही रहे

किसने परवाह की मुरझाते हुए फूलों की
बहार में चमन के रंग निखरते ही रहे

किया पसन्द नहीं झूठ का कोई पहलू
फिर भी सच्चाइयों की शक्ल से डरते ही रहे

खुशी ने जब भी सँवारे तेरे गेसू-ए-खयाल
हवा-ए-गम से बार-बार बिखरते ही रहे

गजल: क्या कहें:

kya kahenगजल: क्या कहें:

वक्त कितना कीमती है क्या कहें
चार दिन की जि़्ान्दगी है क्या कहें

मौत होती है सुना तो है मगर
आज तक देखी नहीं है क्या कहें

सब घटाएँ हो गई हैं मनचली
अब कोई मौसम नहीं है क्या कहें

नालियाँ नहरें बनीं नदियाँ बनीं
कौन सी दरियादिली है क्या कहें

बढ़ गया शक का नज़रिया चारसू
सब्र की कापफी कमी है क्या कहें

खो दिया ईमान पैसे के लिए
आजकल का आदमी है क्या कहें