सांझवाली :

saanjh

सांझ पड़ी सांझवाली पाया चली ऐना
आसपास मोत्यूंहार बीच चलिन गंगा
लक्ष्मी पूछन छिन स्वामी अपणा नरायण
किनू घर आनंद बधाई ?
जागहु दियड़ा इनु घर रात्री
जागहु दियड़ा सुलछिनी रात्री
अगर चंदन को दियड़ा कपूर सारी बाती
जागहु दियड़ा इनु घर रात्री
जागहु दियड़ा सुलछिनी रात्री
रामीचंद्र घर लछीमन घर
सांझ को दियो जगायो
सीता देही बहुरानी जनमें अवांती
इन बहुवन की सुवर्ण कोख ए

शकुनाखर :

shakun

यह मंगल गीत प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारंभ में गाया जाता है।
कार्य सिद्धि हेतु गाए जाने वाले इस गीत में राम लक्ष्मण सीता
की तरह परिजनों के नाम लेते हुए उनके अमरत्व की कामना की
जाती है।

शकुना दे, शकुना दे …….काज ए अति नीको सो रंगीलो
पाटल अंचली कमल को फूल ………सोही फूल मोलावंत
गणेश , रामीचंद्र, लछीमन, लवकुश …….जीवा जनम
आद्या अमरू होय। सोही पाटी पैरी रैना ..सिद्धि बुद्धि सीता
देही बहूरानी …आईवांती पुत्रवांती होय।

संस्कार गीत:

sanskargeet

संस्कार गीत वस्तुत: जन्म, छठी, नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह आदि संस्कारों
के शुभ अवसरों पर स्त्रियों द्वारा समवेत स्वर में गाए जाने वाले मंगल गीत होते हैं।
कहते हैं कि -‘संस्करणं सम्यक्करणं वा संस्कार:’- अर्थात् परिष्कार करना या भली-
भांति तय्यार करना ही संस्कार है। आयुर्वेद में भी रसायन बनाने के लिए विभिन्न
औषधियोंका संस्कार किया जाता है।

विधिवत् रसों में खरल करके या आग में तपाकर जैसे रांगा, तांबा, जस्ता आदि
साधारण धातुओं में चमत्कारी शक्तियां आ जाती हैं; वैसे ही शिक्षा, सत्संग, वातावरण
व परिस्थितियों से मानव की मनोभूमि उन्नत होती है। इसके अतिरिक्त प्राचीन ॠषियों
ने मानव मन के उत्कर्ष के लिए ऐसे संस्कारों का विधान किया है, जिनसे मनुष्य को
श्रेष्ठ बनने में सहायता मिलती है और व्यक्तित्व का सही विकास होता है।