मातृ-पूजा :

maatrika

कुमाउनी लोकगीत :: मातृ-पूजा ::

कै रे लोक उपजनी माई मात्र देव ए
कै रे कोख उपजनी रामीचंद्र लछीमन पूत ए
इनू घरी धौली हारा काज सोहे राज सोहे
कौसल्या राणी कोखी उपजनी रामीचंद्र पूत ए
सुमित्रा राणी कोखी उपजनी लछीमन पूत ए

मातृ लोक उपजनी माई मात्र देव ए
चल तुमी माई मात्र इनू घरी आज ए
इनू घरी घौली हरा काल सोई ए…. अधिक के लिए फोटो पर क्लिक करें

गणेश पूजा :

ganesh(शुभ कार्य की निर्विघ्न सम्पन्नता हेतु पुरोहित किसी दोने या थाली
में गोबर से गणेश बनाकर मंत्रों द्वारा उसकी प्रतिष्ठा एवं वन्दना करता है। साथ में
गिदार वगैरह श्रीगणेश का गुणगान करती चलती हैं)

जय-जय गणपति जय हेरंब
सिद्धि विनायक एकदंत
एकदंत शुभ्रवर्ण गंवरि के नंदन
मूषक वाहन सिंदुरी सोहै
अग्नि बिना होम नहीं,
ब्रह्म बिना वेद नहीं
पुत्र धन दायक यज्ञ रचाये ….
शुभ जय गणपति लगन की बेर ए
आरंभ रचियले शंकर देव
मोती माणिक हीरा चौका पुरीयले
सुवरन भरिये कलशन ए
तसु चौका बैठला रामीचंद्र, लछीमन विप्र ए।
ज्यों लाडली सीतादेवी
बहूरानी काज करैं, राज रचे
फूलनी चै फलनी चै
जाई की वान्ती लै
फूल ब्यौणी ल्यालो बालो
आपू रूपी माणि ए
मोती माणिक हीरा
चौक पुरीयले…

निमंत्रण :

nimantran‘सुवाल पथाई’ के गीतों में एक गीत के द्वारा सारे पास पड़ाेस को निमंत्रण भेजा जाता है —

सुवा रे सुवा बनखण्डी सुवा
ज सुवा नगरिन न्यूत दि आ
हरिया तेरो गात, पिंहली तेरी ठून
ललांगि तेरी खाप, रतनारी आंखी
रतनारी आंखी, नजर तेरी बांकी,
तू जा सुवा नगरिन न्यूत दि आ
नौं नी जाणन्यू मैं गौं नी जाणन्यू
कै घर कै नारी न्यूत दि
सीतादेई नौं छ, जनकपुर गौं छ
तैक स्वामी कणि रामीचंद्र नौं छ
अघिल अघवाड़ी पछिल फुलवाड़ी
तू तै घर तै नारी न्यूत दि आ ….

न्यूतणो :

nyutnoप्रत्येक शुभकार्य के आरंभ में पहले प्राकृतिक शक्तियों को, फिर देवी-देवताओं को निमंत्रण देने के बाद बंधु-बांधवों के अलावा मालिन, कुम्हारिन, अहीरिन के साथ-साथ शंख-घण्ट जैसे कर्म संबंधी उपकरणों को भी कार्य संपन्न कराने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

समाये बधाये न्यूतिये
प्रातहि न्यूतूं मैं सूरज
किरणन को अधिकार
संध्या न्यूतूं मैं चंद्रमा
तारन को अधिकार
गणपति न्यूतूं मैं काज सौं
गणपति सिद्धि ले आय
ब्रह्मा विष्णु न्यूतूं मैं काज सौं
ब्रह्मा विष्णु सृष्टि रचाय
ब्राह्मण न्यूतूं मैं काज सौं
ब्राह्मण वेद पढाय
कामिनी न्यूतूं मैं काज सौं
कामिनी दियो जगाय
सुहागिनी न्यूतूं मैं काज सौं
सुहागिनी मंगल गाय
शंख-घण्ट न्यूतूं मैं काज सौं
शंख-घण्ट शबद सुनाय
मालिनि न्यूतूं मैं काज सौं
मालिनि फूल ले आय
कुम्हारिनि न्यूतूं मैं काज सौं
कुम्हारिनि कलश ले आय
अहिरिनी न्यूतूं मैं काज सौं
अहिरिनी दूध ले आय
धिवरिनी न्यूतूं मैं काज सौं
धिवरिनी शकुन ले आय
गुजरिनी न्यूतूं मैं काज सौं
गुजरिनी दइया ले आय
बहिनिया न्यूतूं मैं काज सौं
बहिनिया रोचन ले आय
बांधव न्यूतूं मैं काज सौं
बांधव शोभा बढाय
बढ़इया न्यूतूं मैं काज सौं
बढ़इया चौकी ले आय
बजनिया न्यूतूं मैं काज सौं
बजनिया बाजा ले आय

सांध्यदीप :

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पतंग उड़ रहे आज इनू घर
दीपक जल रहे आज इनू घर

बधाई होवे सारी रात इनू घर
मंगल गावें सारी रात इनू घर

रामीचंद्र के घर, लछीमन के घर
बधाई होवे सारी रात इनू घर

मंगल गावें सारी रात इनू घर
सीता देही पेलेंगी तेल इनू घर

दीपक जल रहे आज इनू घर
पतंग उड़ रहे आज इनू घर

सांझवाली :

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सांझ पड़ी सांझवाली पाया चली ऐना
आसपास मोत्यूंहार बीच चलिन गंगा
लक्ष्मी पूछन छिन स्वामी अपणा नरायण
किनू घर आनंद बधाई ?
जागहु दियड़ा इनु घर रात्री
जागहु दियड़ा सुलछिनी रात्री
अगर चंदन को दियड़ा कपूर सारी बाती
जागहु दियड़ा इनु घर रात्री
जागहु दियड़ा सुलछिनी रात्री
रामीचंद्र घर लछीमन घर
सांझ को दियो जगायो
सीता देही बहुरानी जनमें अवांती
इन बहुवन की सुवर्ण कोख ए

शकुनाखर :

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यह मंगल गीत प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारंभ में गाया जाता है।
कार्य सिद्धि हेतु गाए जाने वाले इस गीत में राम लक्ष्मण सीता
की तरह परिजनों के नाम लेते हुए उनके अमरत्व की कामना की
जाती है।

शकुना दे, शकुना दे …….काज ए अति नीको सो रंगीलो
पाटल अंचली कमल को फूल ………सोही फूल मोलावंत
गणेश , रामीचंद्र, लछीमन, लवकुश …….जीवा जनम
आद्या अमरू होय। सोही पाटी पैरी रैना ..सिद्धि बुद्धि सीता
देही बहूरानी …आईवांती पुत्रवांती होय।