गीत: मीठे बोल:

meetheगीत: मीठे बोल:

जब से उनको पता चले हैं
माने मीठे बोल के
बोल रहे हैं तब से ही
बातों में मिसरी घोल के

मीठी मीठी बातों से
आंतों की भूख नहीं मिटती
जितनी कीमत दो उतना
राशन मिलता है तोल के

यदि मजदूरी ही देनी हो
तो दिमाग से काम लें
यदि इनाम देना चाहें तो
दान करें दिल खोल के

कम लगती है मजदूरी
वाहे जितनी भी ज्यादा हो
पर इनाम कितना भी कम हो
ज्यादा लगे टटोल के

गीत: पूछो मत:

 

poochho matगीत: पूछो मत:

सचमुच था या ख्वाब
कि पूछो मत
गायब हुए जवाब
कि पूछो मत

भाव कल्पनाओं से
मिलने को
थे कितने बेताब
कि पूछो मत

आंखों ने आंखों को
घेर लिया
पकड़ी गई शराब
कि पूछो मत

एकाकार क्षितिज पर
अधर धरा
रक्तिम हुए गुलाब
कि पूछो मत

गीत : रोजगार – 1

 

rozgar 1गीत : रोजगार – 1

बरखा लीबेर घस्यार
आगो लीबेर रस्यार
पढ़ै लीबेर नौकरी
रुपैं लीबेर बजार

पहाड़ौ को ठण्डो पानी
कदर नी जानी
एथ उथ काईं लगै
तीस नै निमानी

तीस क दगड़ यरौ
भूख जरूरी
खाना क जुगाड़ मैं
जान पड़ौं भ्यार

गौं घर मुलुक है भ्यार
भ्यार मिलौं रोजगार
पढ़ै लीबेर नौकरी
रुपैं लीबेर बजार

उज्याव मैं खाओ गूड़
मिठ हूं चिफलिया
अन्यार मैं खाओ गूड़
तब लगै गुलिया

गुलिया दगड़ यरौ
नून जरूरी
नून तेला लिजी
जानो पणछ बजार

कसि छाजि रैछि बजार
पैंसा लीबेर बहार
पढ़ै लीबेर नौकरी
रुपैं लीबेर बजार

गीत: मौसम:

mausamगीत: मौसम:

हर इक चैनल की मौसम पे पैनी नजर
आज सबसे बड़ी बन गई ये खबर

बर्फ गिरने लगी है हिमाचल में
घुस गई मैं संवरिया के कंबल में

ठण्ड ढूंढे मुझे राजधानी में
हवा झांके है जमना के पानी में

प्यार कौंधा खयालों के बादल में
घुस गई मैं संवरिया के कंबल में

ये कहावत न अब तक पुरानी हुई
जाड़ा चाहे रुई या फुई या दुई

प्यार बरसा मोहब्बत के जंगल में
घुस गई मैं संवरिया के कंबल में

……………………..
(रुई – रजाई, फुई – आग, दुई – जोड़ा)

गीत : वृक्षदेव :

vrixdevगीत : वृक्षदेव :

हे वृक्षदेव! जागो जग के
कण कण से आंखें चार करो
कृत्रिमता से दूषित होती
इस धरती पर उपकार करो

हे बीजब्रह्म ! अंगड़ाई लेकर
मूल प्रकृति को अपनाओ
माया के बंधन में बंधकर
सारी दुनिया में छा जाओ

शाखों वाली शीतलता से
छाया वाली निर्मलता से
दानव आकार बढाते हुए
प्रदूषण का संहार करो

पत्तों जैसी चंचलता से
फूलों जैसी कोमलता से
उद्योगों से धुंधलाते हुए
पवन का पुनरूद्धार करो

गीत : पेड़ाें के गीत :

pedon ke geetगीत : पेड़ाें के गीत :

हम गाते पेड़ाें के गीत
मन भाते पेड़ाें के गीत

शाखाएं नाचने लगी हैं
पत्ते ताली बजा रहे हैं
कोमल कलियां मुसकाई हैं
और फूल खिलखिला रहे हैं

मुस्काते पेड़ाें के गीत
मन भाते पेड़ाें के गीत

चपल पंछियों के कलरव में
मनभावन संगीत सजाकर
मानव मन में प्रकृति के लिए
अपनेपन का भाव जगाकर

लहराते पेड़ाें के गीत
मन भाते पेड़ाें के गीत

गीत: तोता मैना:

 

 

tota mainaगीत: तोता मैना:

तोते से मैना ने पूछा
क्या ऐसे भी दिन आएंगे
जब षहरों में रहने वाले
जंगल के ख़्वाब सजाएंगे

खाली बंजर स्थानों पर
जब पेड़ लगाए जाएंगे
चिमनी के धुएं की टक्कर में
पत्ते हुड़दंग मचाएंगे

ऊपर चिड़ियां रह जाएंगी
नीचे बंदर बस जाएंगे
जीने का सहारा पाएंगे
पषु पक्षी चारा पाएंगे

लंबे चैड़े और हरे भरे
वन उपवन जब लहराएंगे
वे पर्यावरण बनाएंगे
दूषण से हमें बचाएंगे