मत आना :

matकविता : मत आना

जिंदगी ख्वाब नहीं
बेरहम हकीकत है
इससे भिड़ने को
रोजगार की जरूरत है

तुम अगर आए तो
आहट की भनक पाकर के
दिल में इक दर्द
जो सोया हुआ है मुद्दत से

जग न जाए ये
नामुराद बड़ा जिद्दी है
पास पाएगा तकल्लुफ़ में
उलझ जाएगा

खुद भी तरसेगा और
हमको भी तरसाएगा
इसलिए वाकई में मत आना
मेरे मेहबूब मेरी बात सुनो

दानव लोक :

danavकविता : दानव लोक :

दानव लोक में
कोई जगह ऐसी नहीं
जहां पर पूजा न हो
कोई दानव ऐसा नहीं
जो तपस्वी न हो

जप से या तप से
किसी ताकतवर आका की
स्पेशल परमीशन लेकर
कोई दिलदार दानव जब

‘काॅमेडी सरकस’ के
जजों से भी ज्यादा
जोरदार अट्टहास करता है
रावण जैसी हिम्मत या
कंस की सी हरकत करता है

कहते हैं कि प्रजा का
गम गलत करने के लिए
किसी अवतार के हाथों
मारा जाता है

देवलोक :

devकविता : देवलोक :

जब कि देवलोक में
कोई जगह ऐसी नहीं जहां पर खुशी न हो
कोई देवता ऐसा नहीं जो खुश न हो

किसी खुशनुमा जगह पर
कोई हंसता हुआ देवता
जब मौज मस्ती करता है
तब उसे जो आनंद आता है
उसका लुत्फ उठाने की हसरत

कहते हैं कि
दानवों के खयालों में भी
हलचल पैदा कर देती है।

इहलोक :

Christmasकविता : त्रिलोकतंत्र :

इहलोक

पुराने शास्त्रों में
देवताओं की दुनिया को देवलोक,
राक्षसों की दुनिया को दानव लोक
और हमारी दुनिया को मृत्युलोक कहा गया है

इस लोक में
कोई जगह ऐसी नहीं जहां पर गम न हो
कोई आदमी ऐसा नहीं जिसको गम न हो

किसी गमगीन जगह पर
कोई गमज़दा आदमी
जब जश्न मनाता है
तब उसे जो मजा आता है
उसे लूटने की तमन्ना

कहते हैं कि
देवताओं के दिलों में भी
गुदगुदी पैदा कर देती है।

कविता : नियति

niyati

 

कविता : नियति

जीवन पथ की चढ़ाई में

अपने हाथ में होने के बावजूद
वह सब नहीं हो पाता
जो होना चाहिए

जीवन पथ के उतार पर
अपने हाथ ढीले पड़ते ही
वह सब होने लगता है

जो होना होता है

कविता :: अगर ::

agarकविता :: अगर ::

काली रात के अंधेरे को
चीरने की कोशिश में लगे
छोटे से दिए का विश्वास
अगर सूरज की पहली किरन
आने तक नहीं डगमगाता
तो सवेरा हो जाता है

दैवी आपदा को झेलने की
कोशिश में लगे
मासूम बच्चों का विश्वास
अगर कोई सहारा
मिलने तक नहीं डगमगाता
तो जीवन संवर जाता है

ढीठ पेड़ की छाल को
बेधने की कोशिश में लगे
खट्टे मीठे फलों का विश्वास
अगर कली के
फूटने तक नहीं डगमगाता
तो फूल खिल जाता है

फासला :

faslaकोई फासला नहीं है
जमीन और आसमान के बीच में
जहां पे जमीन खतम होती है
वहीं से आसमान शुरू होता है

सूरज की थकी हुई किरनें जब
प्यासे आसमान के
अभावों का संदेश लेकर
समंदर तक पहुंचती हैं तब

खारा पानी आहें भरता है
जिनसे आसमान की
प्यास बुझाने वाले बादलों का
सिलसिला पैदा होता है

मगर उन बादलों का पानी
आसमान के गले के नीचे
नहीं उतर पाता
तो जमीन पे बिखर जाता है

जमीन, जिसे आसमान की बजाय
ज्यादा जरूरत है पानी की
कोई फासला नहीं है
जमीन और आसमान के बीच में

राजनीति :

rajnitiतुम भले ही
ये विश्वास कर लो
कि उजाला
अंधेरे का दुश्मन है

मगर मेरा दिल
कतई तैयार नहीं
अब इस बात पर
यकीन करने को

मेरे हिसाब से
ये दोनों
एक ही थैली के
चट्टे बट्टे हैं

इन्हीं की मिलीभगत से
रात और दिन
बारी बारी से
गद्दी पर बैठते हैं

एक समझौता है
इन दोनों के बीच
हम सबको भरमाने का
या बरगलाए रखने का

ये हमें
अलग अलग मानते हैं
और हम इन्हें
अलग अलग समझते हैं

ग़म :

gam

हम हंसते हैं
हमें देखकर
भूले से भी
यह न समझना

हम ग़म को जानते नहीं या
दुख को पहचानते नहीं हैं
हमने उसे खूब भोगा है
शिद्दत से बरदाश्त किया है

सच तो यह है
हम लोगों ने
उससे ही
हंसना सीखा है

कभी कभी तो उसे देखकर
भी अब हमें हंसी आती है
कभी तरस भी आ जाता है
कभी आंख भी भर आती है

यौवन :

yauvan

क्या होता है यौवन ?

विष्ठा के उत्पादक तन में
भोगों के आराधक मन में
या कि इंद्रियों के कानन में
होली का आयोजन ?

जाती पीढ़ी का अंधापन
आती पीढ़ी का आंदोलन
या अपने अपने वंशों की
मूलवृत्ति की जूठन ?

जन्मजात अधिकार व्यष्टि का
चिरनूतन कर्तव्य स्रष्टि का
या ‘एकोहं बहुस्याम’ की
इच्छा का स्पंदन ?