घोटाला :

ghotalaकविता : घोटाला :

कहा जाता है कि
भारत एक कृषि प्रधान देश है
लेकिन मुझे लगता है कि यहां
कृषि कम होती है और घोटाले ज्यादा होते हैं

पुराने जमाने में पुरानी कविताओं की तरह
पुराने घोटाले भी बरसों याद रहते थे
अब नए जमाने में फिल्मी गानों की तरह
नए घोटाले भी कुछ हफ्तों तक ही याद रहते हैं

मीडिया में बार बार लगातार
धरना प्रदर्शनों की झलक देखकर
जब तक पब्लिक के दिल में तथाकथित
आरोपित को गोली मारने का आइडिया पुख्ता होता है,

तब तक कोई नया घोटाला
पुराने घोटाले के आगे आकर खड़ा हो जाता है कि –
इस गरीब को क्यों घूर रहे हो,
हिम्मत है तो मुझे गोली मार के दिखाओ !

मतलब की भाषा :

Successful shopkeeper at a local food shop with thumbs up looking very happyकविता : मतलब की भाषा :

हमारे मोहल्ले के सबसे बड़े सेठ
हालांकि ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं
मिक्स टाइप की हिंदी बोलते हैं
अंग्रेजी बहुत कम जानते हैं

फिर भी अच्छे अच्छों को
मात दिया करते हैं
न सिर्फ बहसबाजी में
बल्कि बिजनेस में भी

वह जिस भाषा का
इस्तेमाल करते हैं
उसका नाम है
मतलब की भाषा

आंखों से बोलते हैं
व्यवहार से समझते हैं
चेहरे से पढ़ते हैं
मुस्कान से लिखते हैं

मेरी बात :

meriकविता : मेरी बात

मेरे मेहबूब मेरी बात सुनो
तुम खयालों में बहुत भाते हो
शायरी में भी गजब ढाते हो
पर मेरी इल्तिजा है बस इतनी

जिस तरह चांद
दूर से ही भला लगता है
उस तरह दूर से ही
चांदनी छिटकाते रहो

अर्श पे चौदहवीं के
चांद से चमको चाहे
ईद के चांद की मानिंद
लुटाओ खुशियां

दूज के चांद बनो
दूधिया किरनें लेकर
पर मेरी जिंदगी में मत आना
मेरे मेहबूब मेरी बात सुनो

मत आना :

matकविता : मत आना

जिंदगी ख्वाब नहीं
बेरहम हकीकत है
इससे भिड़ने को
रोजगार की जरूरत है

तुम अगर आए तो
आहट की भनक पाकर के
दिल में इक दर्द
जो सोया हुआ है मुद्दत से

जग न जाए ये
नामुराद बड़ा जिद्दी है
पास पाएगा तकल्लुफ़ में
उलझ जाएगा

खुद भी तरसेगा और
हमको भी तरसाएगा
इसलिए वाकई में मत आना
मेरे मेहबूब मेरी बात सुनो

दानव लोक :

danavकविता : दानव लोक :

दानव लोक में
कोई जगह ऐसी नहीं
जहां पर पूजा न हो
कोई दानव ऐसा नहीं
जो तपस्वी न हो

जप से या तप से
किसी ताकतवर आका की
स्पेशल परमीशन लेकर
कोई दिलदार दानव जब

‘काॅमेडी सरकस’ के
जजों से भी ज्यादा
जोरदार अट्टहास करता है
रावण जैसी हिम्मत या
कंस की सी हरकत करता है

कहते हैं कि प्रजा का
गम गलत करने के लिए
किसी अवतार के हाथों
मारा जाता है

देवलोक :

devकविता : देवलोक :

जब कि देवलोक में
कोई जगह ऐसी नहीं जहां पर खुशी न हो
कोई देवता ऐसा नहीं जो खुश न हो

किसी खुशनुमा जगह पर
कोई हंसता हुआ देवता
जब मौज मस्ती करता है
तब उसे जो आनंद आता है
उसका लुत्फ उठाने की हसरत

कहते हैं कि
दानवों के खयालों में भी
हलचल पैदा कर देती है।

इहलोक :

Christmasकविता : त्रिलोकतंत्र :

इहलोक

पुराने शास्त्रों में
देवताओं की दुनिया को देवलोक,
राक्षसों की दुनिया को दानव लोक
और हमारी दुनिया को मृत्युलोक कहा गया है

इस लोक में
कोई जगह ऐसी नहीं जहां पर गम न हो
कोई आदमी ऐसा नहीं जिसको गम न हो

किसी गमगीन जगह पर
कोई गमज़दा आदमी
जब जश्न मनाता है
तब उसे जो मजा आता है
उसे लूटने की तमन्ना

कहते हैं कि
देवताओं के दिलों में भी
गुदगुदी पैदा कर देती है।