गजल: किसलिए:

 

kisliyeगजल: किसलिए:

किसलिए प्यार में सताया गया
कोई कारन नहीं बताया गया

बज्म-ए-उलपफत में जब भी पाँव रखा
दिल का हर मामला दबाया गया

कोई गुनाह न होने पाए
इसलिए ज़्ाुल्म-ओ-सितम ढाया गया

बेवफाई न हो सकी हमसे
उनसे वादा नहीं निभाया गया

जाने अब नींद क्यों नहीं आती
ख़ुद को किस-किस तरह सुलाया गया

मेरी आँखों से अश्क का कतरा
गिर पड़ा या उसे गिराया गया

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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