भजन: सब:

 

sabभजन: सब:

नित धूप बाति जगैबेर
नय फूल पाति चढ़ैबेर
करनान अर्चना सब
करनान वंदना सब

सब सुननान तेरि अद्भुत महिमा
गुण गाथा मंदिर मैं
सब करनान पूजन आराधन
भजन आरती घर मैं

अच्छत पिठ्यां लगैबेर
चूड़ी चर्यो चढ़ैबेर
करनान अर्चना सब
करनान वंदना सब

सब कूनान जो तेरि शरण मैं
एैजां निर्भय है जां
सब मान्नान तेरि कृपा ले क्वै लै
मनवांछित फल पै जां

अतएव मन लगैबेर
श्रद्धा सुमन चढैबेर
करनान अर्चना सब
करनान वंदना सब

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Published by

Dr. Harishchandra Pathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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