गजल: के बात नै:

ke baat naiगजल: के बात नै:

ये दुन्य मैं क्वे आदमी
नादान नै हुन चैं
आचार है व्यवहार है
अनजान नै हुन चैं

के बात नै सम्मान नै
करना कै ई को तुम
तुमरा हथार कै इ को
अपमान नै हुन चैं

के बात नै गर फैद नै
दी सक्ना कै ई खन
तुमरा हथार कै इ को
नुकसान नै हुन चैं

के बात नै कोई खुसी
गर बांटि नै सक्ना
तुमरा हथार गमजदा
इ्रन्सान नै हुन चैं

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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