दिल :

dil

गजल: दिल :

गम का मौसम अरमानों का पतझड़ है
दिल जैसे आँधी में उड़ता कंकड़ है

कह सकते हैं ओठ कान सुन सकते हैं
दिल न कहे ना सुने मामला गड़बड़ है

लिख सकते हैं हाथ नयन पढ़ सकते हैं
दिल न पढ़े ना लिखे बिचारा अनपढ़ है

चख सकती है जीभ दाँत खा सकते हैं
दिल न चखे ना खाए जि़्न्दगी पापड़ है

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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