अंगुष्ठ ग्रहण :

angushthलोकगीत : अंगुष्ठ ग्रहण :

छोड़ो छोड़ो दूलह हमरि अंगुठिया
तुम परदेसन लोक ए

अब कैसे छोड़ंू गोरी तुमरि अंगुठिया
तुमरे बाबुल को बोल ए

छोड़ो छोड़ो दूलह हमरि अंगुठिया
तुम परदेसन लोक ए

अब कैसे छोड़ंू गोरी तुमरि अंगुठिया
तुमरे ककाज्यू को बोल ए

छोड़ो छोड़ो दूलह हमरि अंगुठिया
तुम परदेसन लोक ए

अब कैसे छोड़ंू गोरी तुमरि अंगुठिया
तुमरे ददाज्यू को बोल ए

छोड़ो छोड़ो दूलह हमरि अंगुठिया
तुम परदेसन लोक ए

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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