लगन की बेला :

laganलोकगीत : लगन की बेला :

चंदन चौकी बैठी लड़ैती
केश दिए छिटकाय ए
लाडि़ के बाबुल यूं उठि बोले
केश संभालो मेरी लाडि़ली

अब कैसे केश संभालूं मेरे बबज्यू
आई है लगन की बेला ए
हाथ गड़ुवा ले मायडि़ ठाड़ी
बबज्यू पहिलि धोतिया

बबज्यू हमारे थर-थर कंपे
जैसे वायु से पात ए
तुम मत कांपो बबज्यू हमारे
आई है लगन की बेला ए

हम नहिं कांपें बेटी हमारी
कापें कुश की डालियां
लाडि़ के चाचाज्यू यूं उठि बोले
केश संभालो मेरी लाडि़ली

Published by

Dr. Harishchandra Pathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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