वर चर्चा :

varcharchaलोकगीत : वर चर्चा :

पूरब ढूंढो बेटी पश्चिम ढूंढूं नहिं पाया लाडि़ को कांत ए
उत्तर ढूंढो बेटी दक्षिण ढूंढूं नहिं पाया लाडि़ को कांत ए

एक जो पायो बेटी दक्षिण दिशा वी होलो लाडि़ को कांत ए
वर छ ठूलो बेटी घर छ नानो वी होलो लाडि़ को कांत ए

दिन में बनिया बणज करलो रात सूं जुवा हार ए
उस रे मुरख का झन दिया बाबुल कुल तुम्हारो लाज ए

एक जो पायो बेटी उत्तर दिशा वी होलो लाडि़ को कांत ए
घर छ ठूलो बेटी वर छ नानो वी होलो लाडि़ को कांत ए

हाथ छ धोती कांख में पोथी बैठी पुराण सुनाइए
उस रे पंडित का दियो मेरो बाबुल कुल तुम्हारो उज्यालि ए .

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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