न रोको :

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गजल : न रोको :

ख्वाहिश नहीं करते हो तो करने से न रोको
जीने नहीं देते हो तो मरने से न रोको

तय है जरूर आएगा पतझड़ का जमाना
पर आस की कलियों को संवरने से न रोको

ये बात गवारा है कि उल्फत न करेंगे
पर शहर की गलियों से गुजरने से न रोको

झड़ जाएंगे तो झूम के महकाएंगे गुलशन
ये बीज हवाओं में बिखरने से न रोको

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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