कारक प्रयोग :

karak-prayogभाषा : कारक प्रयोग :

कुमैयाँ के वाक्यों में संज्ञा के दो रूप प्रयुक्त होते हैंः

क – अपरसर्गीः संज्ञा का वह रूप जो वाक्य में परसर्ग की सहायता के बिना
ही कर्ता या कर्म का प्रदर्शन करता है, अपरसर्गी कहलाता है, जैसेः

1. गोरु ऐ गौ।
2. झाड़ लि आ।

ख – सपरसर्गीः संज्ञा का वह रूप जो वाक्य में परसर्ग की सहायता से कर्ता /
कर्म आदि व्याकरणिक सम्बन्धें का प्रदर्शन करता है, सपरसर्गी कहलता है, जैसेः

1. गा्ेरु ले् झाड़ खाछ।

2. उ हमूँ खन दूद दिंछ।

3. काखि नौल है पानि लून्नै।

4. पंड्ज्ज्यिू को् चे्ला्े बजार जालो।

5. हम्र गौं मेैं स्कूल नाहन।

इनके अतिरिक्त कुमाउँनी में संज्ञा का सम्बोधन रूप भी मिलता है, पर वह अपने पश्चात्
किसी परसर्ग की सहायता नहीं लेता, बल्कि उससे पूर्व ही किसी सम्बोधन अव्यय का प्रयोग
किया जाता है, जैसेः ओ ! बाब सैप।

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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