विनोद :: मुलाकात ::

mulakatविनोद :: मुलाकात ::

एक दिन जुहू में घूम रहा था। अचानक एक बच्चा मामू-मामू कहता हुआ आया और पीछे से मेरी
पैण्ट पकड़ ली। मैं रुक गया। तभी उस बच्चे की मां आ गई और बोली -‘माफ करना भाई साहब !
आपने मेरे भाई की जैसी कमीज पहन रखी है , इसलिए बच्चे ने आपको मामू बना दिया।’
मैंने सोचा – इतना छोटा बच्चा भी मामू बना सकता है।

तभी एक आदमी और आ गया। बच्चे की मां ने परिचय कराया – ‘ये मेरे पति हैं। इनका अपना
बाल-विद्या मंदिर है और मेरा नाम सुचित्रा है। मैं सरस्वती बाल मंदिर में काम करती हूं।’
मैंने पूछा – जब पति का अपना बाल-विद्या मंदिर है , तो सरस्वती बाल मंदिर में क्यों हो ?

उसने बताया – सरस्वती बाल मंदिर हमारे घर के पीछे ही है , मुलुण्ड स्टेशन के पास। वहां से
इनके बाल-विद्या मंदिर जाने में भौत टैम लगता है।मैंने कहा – आप लोगों से मिलकर बड़ी खुशी हुई।
आदमी हाथ मिलाते हुए बोला -’कभी आइए ना ! मुलुण्ड की तरफ।’ मैंने भी हाथ छुड़ाते हुए दांत
दिखा दिए।

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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