लोकगीत :: आबदेव ::

aabdevलोकगीत :: आबदेव ::

इन गीतों द्वारा पितृगण को आमन्त्रित किया जाता है।

जाना जाना भंवरिया माथि लोक
मथि लोक पितरन न्यूति ए
नौं नी जाणन्यूं गौं नीं पछाणन्यूं
कां रे होलो पितरन को द्वार ए
जां रे होला सुनु का खुटकुड़ा
रूपा का किवाड़ा रे
वां रे होलो पितरन को द्वार ए
आधा सरग बादल रेखा
आधा सरग चंद्र सूरज ए
आधा सरग पितरन को द्वार ए
वां रे होलो पितरन को द्वार ए ….

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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