समस्या :

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जीवन में जल का पर्याप्त महत्व है। पीने के अतिरिक्त खेती या औद्योगिक गतिविधियो के लिए भी
इसकी जरुरत पड़ती है। प्राकृतिक जल चक्र अनियमित होने के कारण पानी की मात्रा कम होती
चली जा रही है। भूजल में नमक का अंश बढ़ने से पानी की गुणवत्ता तथा सूखा बढने के कारण
पानी की उपलब्घता प्रभावित हो रही है। जलवायु परिवर्तन का यही हाल रहा तो आने वाले समय
में और भी बुरी दशा हो जाएगी।

अनियंत्रित विकास की दौड़ में मशगूल खास लोगों की लापरवाही की कीमत आम आदमी को
चुकानी पड़ रही है। इन आम आदमियों में भी छोटे छोटे गांवों के उन किसानों की दशा ज्यादा
खराब है, जो खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं। अनावश्यक वर्षा अथवा समय पर वर्षा न होने से
फसल पर बुरा असर पड़ता है। दरअसल ग्रामीण कृषक मौसम के बदले हुए मिजाज की यह मार
नहीं झेल पाते। यही कारण है कि कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान आत्महत्या तक करने को
मजबूर हो जाते हैं। …. अधिक के लिए ‘DEVDAAR.COM’

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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