स्वनिम :

swanimकुमैयां में स्वर और व्यंजन वही हैं, जो प्राय: संस्कृत के हैंं। अन्य कुछ भाषाओं की तरह
इसमें भी लिखित स्वर ॠ तथा व्यंजन ष का उच्चारण प्राय: रि तथा श या ख की तरह
किया जाता है। इन सबके बावजूद इसकी अपनी विशेषता यह है कि इसमें दीर्घ स्वरों के
ह्रस्व रूप भी स्वतंत्र ध्वनियों के रूप में विद्यमान हैं; जैसे – आ/आ् । उदाहरण – आम/आ्म ,
दाद/दा्द , काखि/का्खि , बात/बा्त आदि।

ऑ तथा ओ् –
स्वनिम आ के अलावा कुमैयां में ऑ तथा ओ् का प्रयोग भी प्रचलित है। इसके उदाहरण
विदेशी भाषाओं से अपनाए गए शब्दों के उच्चारण में अधिक मिलते हैं; यथा – बाल/बॉल ,
हाल/ हॉल , तोप/तो्प , खोट/खो्ट आदि। वैसे कुमैयां बोलने वालों में पांच को पोंच कहने
वालों का अभाव भी नहीं है।

प्रकार –
स्वरों के उच्चारण में यद्यपि जीभ अपना प्रयास अवश्य करती है, तथापि श्वास के बाहर
निकलने में कोई अवरोध उत्पन्न नहीं होता। मूल स्वर हैं – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ,
ए, ओ। जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ एक स्वर का उच्चारण करने के साथ-साथ उसमें
दूसरे स्वर का उच्चारण मिश्रित करने का प्रयास करती है, वे संयुक्त स्वर कहलाते हैं,
जैसेः ऐ (अ + इ़़) तथा औ (अ + उ) ।

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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