सौतेलि इज:

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भूत-प्रेत संबंधी कथाएं : भूत-प्रेत संबंधी कथाओं में अतृप्त जीवात्माएं भूत-प्रेत या चुड़ैल बनकर कभी किसी का भला और कभी किसी का बुरा करती हैं। कभी वे प्रसन्न होकर किसी को अतुल संपत्ति का खजाना दिखाती हैं, तो कभी नाराज होकर किसी के पीछे ही पड़ जाती हैं। इन कथाओं के लोकोत्तर शक्तियों के चमत्कार के प्रसंग श्रोताओं की जिज्ञासा बढ़ाते हैं। उदाहरण –

मूल कथा : भौत पैलिया क बखत में एक बड़ सौंकार आदिम छि। उ बड़ दानि धरिमातमा भै और वीकि घरवालि लै उसी भलि भै। द्वियै सैंणि बैग एतुक भल भै कि सबै उनरि वाहिवाही करनेर भै पर उं निरसन्तानि भै। कई बरसन बाद भइ लै त चेलि। लोग कूनेर भै कि जां नाक वां नथ नैं। एतणि माया पर उकैं खाणि क्वे नैं।

द्वीनैं की बडि़ लाडि़लि भै उ चेलि। जब उ चेलि सात आठ बरसै कि भई त वी कि इज सख्त बिमार पडि़। बचणैं कि के आस निं रै। आपण आखिरी बखत में वील मालिक थैं कयो: ”मैं त आब निं बचन्युं। यो चेलि आब तुमरी पालणि छु। तुम मेरि यो आखिरी बात धरि दिया कि दुसर ब्या झन करिया। नानि का लिजिया सौतेलि मै झन लया।”

बैगे लै उ बखत त बचन दि दिय पर सैंणिका मरिया का छयैं म्हैंण बाद लोगन का बुझूण पर वील दुसर ब्या करि ल्हि। सौतेलि मै लै घर मेें आते ही आपणि सौतेलि हुॅं चाल परपंच करण सुरु कर दि और बरस द्वि एकाक बाद जब वीकि आपणि लै चेलि है गई त उ आपणि सौतेलि कैं न त भरि पेट खाण हुॅं द्यो न भल पैनण हुं। बाब लै सब कुछ देखनेर समझनेर भयो पर अब पछतै बेर कि करौ। चेलि आपण दुख आपण बाबु थैं लै निं कूंनेर भइ। उसिकै दुख में झुरि झुरि मरने भइ।

Published by

drhcpathak

Retired Hindi Professor / Researcher / Author / Writer / Lyricist

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